भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई में 49 वाँ दीक्षांत समारोह ।डॉ एम.एस. वालियाथन ने दीक्षांत अभिभाषण दियाप्रदत्त उपाधियाँः 1846 पीएच.डी. उपाधियाँः 173
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(बायं से दाहिने) डॉ. अनिल काकोडकर, अध्यक्ष, शासीमंडल, भा.प्रौ.सं मुंबई, डॉ. एम.एस वालियाथन, राष्ट्रीय अनुसंधान प्राध्यापक तथा प्रोफेसर देवांग खख्खर, निदेशक, भाप्रौसं मुंबई, 49 वें दीक्षांत समारोह, सत्र- I |
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शैक्षिक जीवन में दीक्षांत दिवस वह परमोत्कर्ष है जिसके लिए एक विद्यार्थी कठिन परिश्रम करता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई ने 5 अगस्त 2011 को अपने परिसर में 49 वाँ दीक्षांत का प्रथम सत्र आयोजित किया । इस प्रतिष्ठित संस्थान से पास होनेवाले विद्यार्थियों की बड़ी संख्या के कारण भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुबई ने दो अलग -अलग सत्रों में दीक्षांत समारोह आयोजित किए। डॉ. एम.एस.वालियाथन, राष्ट्रीय अनुसंधान प्राध्यापक इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। उन्होंने दीक्षांत अभिभाषण दिया। 5 अगस्त को आयोजित प्रथम सत्र में संस्थान ने पीएच.डी. और निष्णात की उपाधियाँ प्रदान की, वहीं 7 अगस्त को बी.टेक., बी.टेक.एम.टेक (द्वि-उपाधियाँ) प्रदान की।
प्रो. देवांग खख्खर, निदेशक, भा.प्रौ.सं.मुंबई ने इस अवसर पर अभिभाण देते हुए कहा , भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए बड़ी अभिलाषा का स्थान बना हुआ है। राष्ट्रीय परीक्षाओं में अच्छे स्थान पानेवालों को यह आकर्षित कर रहा है । सभी विभागों में मास्टर एवं पीएच.डी कार्यक्रम बहुत ही चयनात्मक है। संस्थान ने विगत वर्षों से स्नातकोत्तर और स्नातक स्तर पर अपने शैक्षिक कार्यक्रमों के पुनर्गठन तथा सुदृढ़ बनाने के लिए कई पहल की है। स्नातकोत्तर स्तर पर नई पहल में कई विद्या शाखाओं में एम.एससी-पीएच.डी. द्वि-उपाधि कार्यक्रम और एम.टेक-पी.एच.डी द्वि-उपाधि कार्यक्रम शामिल हैं। यह घोषणा करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है कि आज एस.एस सी कार्यक्रम का प्रथम स्नातक उपाधि प्राप्त करेंगे। विनिर्माण-पदार्थ एवं मॉडलिंग में अनोखा अंतरविभागीय एम.टेक कार्यक्रम के प्रथम स्नातक आज अपनी उपाधियाँ प्राप्त करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि विगत कुछ वर्षों में विभिन्न कार्यक्रमों में पीएच.डी विद्यार्थी के नामांकन में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। 2001-02 में पीएचडी विद्यार्थियों की संख्या 771 थी, जो इस वर्ष 1879 हो गई है। मात्र नौ वर्षों के कालावधि में 150 % की वृद्धि हुई है।.
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श्री डी उदय कुमार, भा.प्रौ.सं मुंबई में 49 वें दीक्षांत समारोह में डॉ.शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक प्राप्त करते हुए। |
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इस दीक्षांत समारोह में, कुल 1846 उपाधियाँ प्रदान की गई, जिसमें 226 पंचवर्षीय बी.टेक.-एम.टेक. द्वि-उपाधि भी शामिल हैं। इनमें 173 पीएच.डी (इनमें एम.एससी.-पीएच.डी द्वि-उपाधि) 1 एम.एस (अनुसंधान), 12 एम.फिल., 770 एम.टेक., 97 मास्टर ऑफ मैनेजमेंट., 57 एम.डेस., 5 पीजीडीआईआईटी, 18 पंचवर्षीय समाकलित एम.एससी., 158 द्वि-वर्षीय एम.एससी और 328 बी.टेक की उपाधियाँ हैं। वर्ष 2010 में आयोजित 48 वें दीक्षांत समारोह में प्रदत्त की गई उपाधियों की संख्या 1691 थीं। कुल 53 पदक प्रदान किए गए इसमें श्री. निसर्ग कीर्ति कुमार शाह (बी.टेक, संगणक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी) तथा श्री. मानस नितीन राच्च (द्वि-उपाधि, विद्युत अभियांत्रिकी) को इस दीक्षांत समारोह में दिए गए संस्थान पदक भी शामिल है। प्रा. शिव प्रसाद, संकायाध्यक्ष (छात्र कार्य), इस अवसर पर टिप्पणी करते हुए कहा, विद्यार्थियों के बीच अनुसंधान अभिरूचि के विकास तथा इसे बनाए रखने के लिए भा.प्रौ.सं मुंबई ने कई शैक्षिक गतिविधियाँ शुरू की हैं। स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए पीएच.डी की डिग्री उपाधि की प्राप्ति में प्रशासनिक रूप से द्वि-उपाधि कार्यक्रम को अधिक सुगम करने के लिए विभिन्न प्रकार के द्वि-उपाधि कार्यक्रम शुरू किए हैं। विज्ञान विषय में एम.एससी/पीएच.डी तथा अभियांत्रिकी विषयों में एम.टेक/पीएच.डी की द्वि-उपाधि शामिल है। हमें विश्वास है कि ये द्वि-उपाधियाँ युवा विद्यार्थियों को अनुसंधान में आसानी से कैरियर बनाने में सहायता करेगी और बिना रूकावट डाले पीएच.डी कार्यक्रम तक ले जाएंगी। मुख्य अतिथि, डॉ. एम.एस.वालियाथन, के साथ ही विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने इस समारोह की शोभा बढ़ाई। इसमें भा.प्रौ.सं मुंबई के अध्यक्ष डॉ.अनिल काकोडकर तथा शासी मंडल के सदस्य सहित सफल विद्यार्थिगण तथा उनके अभिमानित अभिभावक शामिल हैं।
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