भा.प्रौ.सं मुंबई ने भूतपूर्व छात्र दिवस 2011 मनाया।

 

-      अपनी विरासत परियोजना के लिए क्लास 86 ने ` 2.5 करोड़ दिए।

-      चयन किए गए 14 भूतपूर्व छात्रों को विशिष्ट सेवा पुरस्कार प्रदान किया गया।

 

मुंबई, 25 दिसम्बर 2011: पूरे देश तथा विदेश के लगभग एक हजार भूतपूर्व छात्रों ने एक साथ होकर अपने संस्मरण, नेटवर्क को अद्यतन करने, पुरानी यादों को तरोताजा करने तथा अपने अल्मा मेटर से पुनः जुड़ने के लिए भा.प्रौ.सं मुंबई में भूतपूर्व छात्र दिवस मनाया ।

 

अपनी विरासत परियोजना के लिए क्लास 86 ने ` 2.5 करोड़ दिएः अपनी विरासत परियोजना के एक भाग के रूप में क्लास 1986 ने औपचारिक रूप से एक चेक संस्थान के निदेशक, प्रा. देवांग खख्खर को दिया। कुल मिलाकर निम्नवत दो श्रेणी में तीन परियोजनाओं की पहचान की गई है।

 

 

1)   विद्यार्थी जीवन की गुणवत्ता में विकास वर्ग में दो परियोजनाएं हैंः- वित्तीय सहायता कार्यक्रम (एफएपी) और परामर्श सेवा कार्यक्रम (सीएसपी)। सीएसपी एक नया कार्यक्रम स्थापित किया जा रहा है ताकि भा.प्रौ.सं मुंबई में प्रोफेशनल परामर्श सेवा में संवृद्धि कर विद्यार्थियों की शैक्षिक, भावनात्मक तथा मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं का निराकरण किया जा सके। हर एक को भा.प्रौ.सं मुंबई शिक्षा, वित्तीय सहायता का लक्ष्य बनाकर वित्तीय सहायता कार्यक्रम चलाई जा रही है। 1.7 करोड़ से भी अधिक रूपयों के संवितरण से 500 विद्यार्थी पहले ही लाभान्वित हुए हैं। ऋण अदायगी में कोई भी चूक नहीं है।

 

 

2)   गुरूदक्षिणा वर्ग में संकाय सहायता कार्यक्रम की एक परियोजना शुरू की गयी है। संकाय सहायता कार्यक्रम का लक्ष्य शिक्षण, अनुसंधान, प्रयोगशाला विकास एवं चुनिंदा प्रोफेशनल गतिविधियों के क्षेत्र में संकाय के द्वारा किए गए योगदान के आधार पर शिक्षण /अनुसंधान उत्कृष्ठता पुरस्कार गठन करना है। हर एक योगदान को एक अंक दिया जाता है और हर एक वर्ग में ` 40,000 का नक़द पुरस्कार है। इसके अंतर्गत, एक संकाय दो व तीन वर्ग में जीत सकते हैं और एक वर्ष में 1,20,000 तक पा सकते हैं।

 

86 बैच, वर्तमान शीर्ष संकाय पुरस्कार कार्यक्रम के लिए अपने विरासत परियोजना दान में सहायता देना जारी रखेंगे। क्लास 86 ने 24 से 26 दिसम्बर तक अपना पुर्नमिलन रजत जयंती मनाया।

 

छात्रावास संचालक भूतपूर्व छात्र टीम (हॅटस):   भूतपूर्व छात्र दिवस के एक भाग के रूप में हॅटस ने छात्रावास पुर्नमिलन का आयोजन किया। सभी छात्रावासों के 150 से अधिक मेस कामगारों ने ` 70 लाख मेस वर्कर अवार्ड के रूप में प्राप्त किए। हॅटस का एक अन्य पहल है "मेक होस्टल माय होम"। इसके माध्यम से भूतपूर्व छात्र वर्तमान विद्यार्थियों के उनके छात्रावासों में रहन-सहन की स्थिति में विकास करना है। कपड़े साफ करने की एक बड़ी मशीन का उद्धाटन छात्रावास 8 में हुआ। इस छात्रावास के भूतपूर्व छात्र (क्लास 70) में इसे दान में दिया है। हॅटस उन सभी कामगारों जिन्होंने 25 वर्ष से अधिक की सेवाएं दी है, को ` 25,000 देता है और सेवानिवृत्ति पर ` 75,000 देता है। इससे साबित होता है कि भूतपूर्व छात्र अपने संबंधित छात्रावासों से विशेष लगाव बनाए रखते हैं।

 

विशिष्ट सेवा पुरस्कार (डीएसए): भूतपूर्व छात्र दिवस का एक ऐसा अवसर है जब संस्थान की प्रगति में उल्लेखनीय एवं अगाध गति से योगदान करने वाले भूतपूर्व छात्रों को पुरस्कार देने की घोषणा होती है और उन्हें प्रतिष्ठित विशिष्ट सेवा पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इस वर्ष के पुरस्कार प्राप्त कर्ता हैंः

 

 

    समीर कुमारः  मार्च 2009 में स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में और सितम्बर 2010 में गोवा बाह्यस्थ कार्यक्रम में सक्रिय सहभागी थे। बैंगलूरू शाखा के एक सक्रिय सदस्य श्री. कुमार ने इट्टामडू गांव ज्ञान केन्द्र की स्थापना में बड़ी भूमिका निभायी है।

 

     अमित खंडेलवालः आईआईटीबीएचएफ और सैन फ्रैन्सिस्को बे एरिया भा.प्रौ.सं मुंबई शाखा की गतिविधियों में आठ वर्षों से अधिक समय से जुड़े हैं। विगत दो वर्षों से इस शाखा के अध्यक्ष पद पर आसीन है।

 

डॉ. दीपक पाटीलः फिलहाल भा.प्रौ.सं मुंबई भूतपूर्व छात्र संघ के निदेशक मंडल के सदस्य हैं। शराब तथा ड्रग के व्यसनी लोगों तथा उनके परिवार के सदस्यों को सलाह देने में, साथ ही ठीक हो जाने पर उनके पुनर्वास में सहायता करने के लिए अपना बहुत सारा समय देते हैं।

 

प्रा. अनिल सैगलः  2005 पैन-आईआईटी, वॉशिंग्टन, डी.सी और 2008 में भा.प्रौ.सं मुंबई स्वर्ण जयंती, न्यूयॉर्क के एक स्वयंसेवक थे। आप फैन 2011 बोस्टन के सह आयोजक थे और आईआईटीसाईन, आईआईटी भूतपूर्व छात्र संघ, बोस्टन शाखा के कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दी है।

 

कुमार शाहः   आपने 2008 में स्वर्ण जयंती समारोह के आयोजन में सहायता की और इस वर्ष आईआईटी वैश्विक सम्मेलन एनवाईसी की सहअध्यक्षता की। आप भूतपूर्व छात्र न्यूय़ॉर्क शाखा के सक्रिय सदस्य हैं और टाई न्यूयॉर्क के निदेशक है।

 

प्रा. चिनिया रविशंकरः भा.प्रौ.सं मुंबई संकाय-भूतपूर्व छात्र नेटवर्क के एक सक्रिय सदस्य हैं।

 

मधुर कोठारेः  आपने तीन विशेष अभिरूचि मेलिंग सूची/फोरम अर्थात आईआईटी भूतपूर्व छात्र निवेशक समूह, आईआईटी भूतपूर्व छात्र रनर समूह और आईआईटी भूतपूर्व छात्र एडवेण्चरर ग्रुप को एक साथ लाने का कार्य किया है। फिलहाल यह मंच परिचर्चा और निवेशक सम्मिलन, दौड़ की स्पर्धा में भाग लेने, पर्वतारोहण और समुद्री यात्राओं जैसी साहसिक गतिविधियों के कारण प्रसिद्धि में है। श्री. कोठारे दिसम्बर 2012 में अपने बैच के पुर्नमिलन रजत जयंती का इंतेज़ार कर रहे हैं।

 

अश्विन दोशीः   अश्विन दोशी (गुज्जू) का नाम भा.प्रौ.सं मुंबई के परिसर में होनेवाले खेलकूद का पर्यायवाची बन गया है। खेलकूद उनका जूनून था और अब भी यह बना हुआ है। पाँचों आईआईटी में सभी अंतर-आईआईटी खेलकूद स्पर्धा में भाग ले चूके हैं। श्री अश्विन दोशी के पास खेल के क्षेत्र में वर्तमान विद्यार्थियों के साथ बांटने के लिए एक प्रगाढ़ अनुभव हैं। आप प्रायः आईआईटी परिसर में आते रहते हैं, विशेषकर प्रतिवर्ष दिसम्बर में होने वाले अंतर-आईआईटी खेल स्पर्धा के समय। श्री. दोशी ने लुईस जॉर्ज के साथ वार्षिक भूतपूर्व छात्र बनाम विद्यार्थी बास्केटबॉल मैच अक्तूबर 2005 में शुरू किया था। विद्यार्थी और भूतपूर्व विद्यार्थियों के बीच आपसी मेलजोल का यह एक सफल मंच है और यह अब पूर्णतः भूतपूर्व छात्र खेलकूद दिवस के रूप में बदल गया है।

 

कैप्टन. लुईस जॉर्जः   आपने बास्केटबॉल, हॉकी, फुटबॉल एवं एथेलेटिक जैसे अंतर-छात्रावास स्पर्धाओं में भाग लिया और हॉकी को छोड़कर इन सभी में आपने भा.प्रौ.सं मुंबई का प्रतिनिधित्व किया। वर्तमान में आप बास्केचबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के पैनल रेफरी है। आप आईआईटी वेटरन्स बास्केटबॉल टीम (2005 में शुरू हुआ था) के संस्थापक सदस्य हैं। आपने कई बार आईआईटी बास्केटबॉल टीम के साथा फ्रेंडली मैंच खेला है।

 

प्रा. अजीत ताम्हणेः  फॅन कार्यक्रम के आयोजन में आप सक्रिय रूप से लगे हुए हैं और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में कार्यपालक प्रबंधन कार्यक्रम को पूर्ण करने में भा.प्रौ.सं. मुंबई के संकाय सदस्यों को सहायता दी है।

 

प्रा. प्रमोद खारगोनेकरः  आपने 1997 में भा.प्रौ.सं मुंबई से विशिष्ट भूतपूर्व छात्र पुरस्कार प्राप्त किया है। फॅन के आप बहुत ही सक्रिय सदस्य है।

 

कुमार के. अय्यरः आपने क्लास 84 विरासत परियोजना के लिए धनसंग्रहण में महत्वपूर्ण योगदान किया है। आपने लगभग अकेला ही धनसंग्रहण को सुचारू रूप दिया है।

 

विकास जोशीः क्लास 85 की विरासत परियोजना के लिए धनसंग्रहण में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। आपने स्वयं ही इस परियोजना के लिए रु. 45 लाख दान में दिए।