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वाहन चलाते हुए मोबाइल फ़ोन का प्रयोग: अब बस करो!

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई (आईआईटीबी) के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन से सामने आया है कि वाहन चालन करते समय मोबाइल फोन का प्रयोग चालक का ध्यान वाहन-चालन से हटा देता है एवं सड़क पर होने वाली किसी भी खतरनाक स्थिति का सामना करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। अध्ययन के परिणामों में दिखाया है कि वाहन चलाते समय फोन पर वार्तालाप और पाठ-संदेश दोनों ही एक वाहन चालक के चालन निष्पादन को कम कर देती हैं।
 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लू. एच. ओ.) की एक रिपोर्ट के अनुसार, सड़क दुर्घटना मृत्यु के प्रमुख कारणों में नौवें स्थान पर हैं। वहीँ भारत एक ऐसा राष्ट्र है जहां हर मिनट एक दुर्घटना होती है और हर 4 मिनट में एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। एक पुराने अध्ययन में पता चला था कि वाहन चालन के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले चालकों में से 31 प्रतिशत चालक दुर्घटनाओं के शिकार हुए हैं। वर्तमान अध्ययन में भारत के विभिन्न आयु समूहों के चालकों में मोबाइल फोन के प्रयोग का चालकों के प्रतिक्रिया समय पर प्रभाव का विश्लेषण किया गया है।
 
आईआईटीबी सहयोगी प्राध्यापक प्रा.नागेन्द्र आर. वेलागा कहते हैं, "भारतीय वाहन चालकों और विकसित देशों के वाहन चालकों के बीच वाहन-चालन व्यवहार में विभिन्न तरह के अंतर हैं, जैसे कि लेन अनुशासन और दो वाहनों के बीच बहुत कम अंतर रखना। इसके अलावा, मोबाइल फोन उपयोग की आदतों में भी  अंतर है। वर्तमान अध्ययन के सभी प्रतिभागियों में से लगभग 60 प्रतिशत वाहन चालकों ने गाड़ी चलाते समय मोबाइल फ़ोन का प्रयोग किया था, जो कि भारतीय चालकों में गाडी चलाते हुए फ़ोन पर बात करने की भारी  प्रवृत्ति को दर्शाता है।" प्रा. वेलागा ने यह अध्ययन अपनी सह-लेखिका सुश्री पुष्पा चौधरी के साथ संपन्न किया है।
 
यह अध्ययन तीन आयु समूहों युवा: (30 वर्ष से कम आयु) , मध्य - आयु: (30  से 50  वर्ष,) एवं  वृद्ध: 50  वर्ष से अधिक आयु) के 100  लाइसेंस प्राप्त वाहन चालकों पर किया गया है। सिम्युलेटर का उपयोग करते हुए, प्रतिभागियों ने पांच परिदृश्यों में वाहन चालन किया। पहला परिदृश्य मोबाइल फोन इस्तेमाल किए बिना था, दूसरे में फोन पर एक साधारण वार्तालाप शामिल था जैसे 'आप अपनी पिछली यात्रा के लिए कहाँ गए?', एवं तीसरे परिदृश्य में गठबंधन समस्याओं और अंकगणितीय प्रश्नों और जटिल पहेलियां हल करना शामिल थी। चौथे परिदृश्य में चालक ने वाहन चालन करते हुए 10 अक्षरों के छोटे पाठ संदेश को उत्तर दिया, एवं पाँचवे परिदृश्य में चालकों ने जटिल पाठ संदेश का लंबे पाठ संदेश में उत्तर दिए।
 
इन परिदृश्य की प्रत्येक लम्बाई 3.5 कि.मी. थी, जिसमें एक खतरनाक घटना भी सम्मिलित थी जैसे, एक पार्क किया गया वाहन या सड़क पार करने वाला पैदल यात्री। शोधकर्ताओं ने प्रत्येक ड्राइवर के लिए 'प्रतिक्रिया-समय' मापा। डा. वेलागा प्रतिक्रिया समय का अर्थ बताते हुए कहते हैं कि, "किसी खतरे के उजागर होने एवं चालक की पहली प्रतिक्रिया, जैसे एक्सेलरेटर से पाँव हटाना या ब्रेक लगाना, के बीच व्यतीत समय को प्रतिक्रिया समय कहा जाता है।”
 
इस अध्ययन के परिणाम स्वरूप इन सभी परिदृश्यों में वाहन चालक की प्रतिक्रिया समय में एक खतरनाक वृद्धि दिखाते हैं। पैदल यात्री के सड़क पार करने की खतरनाक घटना में सरल बातचीत करने वाले चालकों को फोन का उपयोग नहीं करने वाले हुए चालकों की तुलना में  40% अधिक समय लगा। जटिल एवं लम्बे पाठ संदेशों का उत्तर देने के परिदृश्य में चालकों के प्रतिक्रिया समय में 204 % की वृद्धि हुई। अन्य ख़तरनाक स्थितियों जैसे पार्क किया हुए वाहन में भी समान परिणाम पाए गए। सरल वार्तालाप के समय प्रतिक्रिया समय में 48 % की वृद्धि पायी गयी, एवं जटिल पाठ संदेशों का उत्तर देते हुए प्रतिक्रिया समय में  171 % की वृद्धि हुई। अतः दोनों प्रकार के मोबाइल फोन उपयोग (वार्तालाप और पाठ-संदेश) का वाहन चालन पर दुष्प्रभाव देखा गया।
 
प्रा. वेलगा के अनुसार "मोबाइल फोन उपयोग के दौरान प्रतिक्रिया समय में भारी वृद्धि का मुख्य कारण आगे की सड़क से ध्यान भटकना है, जिसके कारण वाहन चालक अचानक होने वाली घटनाओं पर ध्यान देने में विफल हो जाते हैं।" किन्तु पाठ-सन्देश व बातचीत के बीच इन गंभीर मतभेदों का क्या कारण है? इसका स्पष्टीकरण देते हुए डा. वेलगा कहते हैं कि, "मोबाइल फ़ोन पर बात करते समय चालक आगे सड़क देख सकते हैं इस कारण वह आने वाले खतरे के प्रति पाठ-सन्देश का उत्तर देने की तुलना में अधिक सचेत रहते हैं।"
 
भविष्य में शोधकर्ता इस अध्ययन को आगे बढ़ाने का विचार रखते हुए विभिन्न परिदृश्यों और अलग-अलग प्रकार के विकर्षणों जैसे वाहन चालन करते समय खाना अथवा संगीत सुनने का वाहन चालकों के प्रतिक्रिया समय पर प्रभाव देखना चाहते हैं। शोधकर्ता इस अध्ययन के निष्कर्षों पर सरकार एवं अन्य नीति-निर्माताओं के साथ चिंतन करने के भी इच्छुक हैं।
 
अध्ययन के निष्कर्षों ने इस तथ्य को पुनर्स्थापित किया है कि भारत में वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करना, सड़क पर वाहन चालकों और पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए खतरा हो सकता है। कानूनन प्रतिबंधित होने के बाद भी अक्सर सड़कों पर लोग वाहन चालन करते हुए फोन का उपयोग करते पाए जाते हैं। अंततः प्रा. वेलगा इस अध्ययन के महत्व दर्शाते हुए कहते हैं कि, "इस अध्ययन के निष्कर्ष समाज के लिए एक सूचनात्मक अनुस्मारक का काम कर सकते हैं। वाहन चालन करते हुए मोबाइल फ़ोन का उपयोग केवल उस व्यक्ति के लिए हानिकारक नहीं है जो वाहन चला रहा है किन्तु अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।"

 

 

Article written by

Spoorthy Raman

Graphics/Image by

Purabi Deshpande, Research Matters

Gubbi Labs Page link

https://researchmatters.in/article/driving-and-texting-stop-it-now

Research Domain: 
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