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स्वर्ण का उपचारात्मक स्पर्श

  • सोने के यथास्थान अपघटन एक कैंसर ऊतक में liposomes लेपित.

कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए स्वर्ण के नैनोस्ट्रक्चर कितने सुरक्षित हैं? भा.प्रौ.सं मुंबई में एक शोध टीम का कहना है यह अब काफी सुरक्षित है । टीम ने लाइपोस एयू एनपीज़ नामक एक नए स्वर्ण के नैनोपार्टिकल को विकसित किया है जो कि जैविक रूप से सुरक्षित और अप्रत्याशित तरीके से कैंसर का इलाज करने की अभूतपूर्व क्षमता रखता है। प्राचीन काल से, स्वर्ण को जीवन के अमृत के रूप में  देखा गया है - पौराणिक मिथकों के अनुसार यह एक ऐसा तत्व है जो चमत्कारी शक्ति से युक्त है जो वस्तु के शुद्धिकरण, जीवन में फिर से प्राण फूंकने, और मानव शरीर को मजबूत करने, तथा  कई बीमारियों का इलाज करके दीर्घायु जीवन देने में सक्षम है । संभवत: इन मिथकों ने प्रथम नैनोविज्ञानविदों को  - जो  परमाणु, आणविक, और सुप्रामोलेक्युलर स्तर पर पदार्थ में परिवर्तन करते हैं - कैंसर के उपचार में निदानक और चिकित्सीय एजेंटों के रूप में स्वर्ण के नैनोकणों (एनपी) के सृजन एवं उनकी व्यवहार्यता के परीक्षण  हेतु प्रेरित किया। अधिकतर  परिणाम  आशाजनक रहे |स्वर्ण एनपीएस स्वस्थ ऊतकों को नहीं मारते - विकिरण और कीमोथेरेपी की तुलना में एक लाभ। उन्हें विशिष्ट ऊतकों और कोशिकाओं पर लक्षित किया जा सकता है। ये नियंत्रित तरीके से कैंसर विरोधी दवाओं के वाहक बन सकते हैं और दवा को समयनुसार मुक्त कर सकते हैं। और अंत में लेकिन काफी महत्चपूर्ण, उनके आंतरिक ऑप्टिकल गुणों को इमेजिंग और घातक कोशिकाओं के फोटोथर्मल विनाश के लिए उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, इस स्वर्ण के कवच में भी एक कमी है - स्वर्ण  बायोडिग्रेडेबल नहीं है। इसका मतलब यह है कि हमारे शरीर में स्वर्ण के एनपी टूटते नहीं हैं और उन्हें गुर्दे के माध्यम से इनका निष्काशन नहीं कर सकते हैं। शारीरिक प्रणाली में एक बार स्वर्ण एनपी की प्रविष्टि होने पर, वे अंगों में जमा हो जाते हैं और रोगी के लिए संभावित स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं। एक सफल अनुसंधान प्रयास में, भा.प्रौ.सं मुंबई में डा. रोहित श्रीवास्तव और डॉ रींति बनर्जी ने एक बहुआयामी स्वर्ण एनपी विकसित किया है जिसे लाइपोस एयू एनपीएस नाम दिया गया है, जो कि फोटॉथर्ल थेरेपी (पीटीटी) के साथ परंपरागत दवा वितरण और ऑप्टिकल इमेजिंग को जोड़ती है। यह एनपी का ऐसा प्रथम उदाहरण है जो उष्मीय ऊर्जा की उपस्थिति में आकार को 5 एनएम तक कर   सकती है - ऐसा आकार जोकि गुर्दे द्वारा की जाने वाली निकासी के अनुरूप है। यह शोध रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित नैनोस्केल पत्रिका में एक पेपर के रूप में प्रकाशित हुई  है।जहाँ  स्वर्ण के एनपी ने लक्षित कैंसर के उपचार के लिए नई संभावनाएं पेश की हैं, वहीं इसकी डिज़ाइन संबंधी चुनौतियां भी अनेक हैं । उदाहरण के लिए, यह तो सिद्ध हो गया है कि सोने एनपी की आकृति, आकार और संरचना, परिमाण में अपनी प्रभावशीलता बढ़ा या घटा सकती हैं। इंजीनियरिंग सोना एनपी के अपने व्यापक अनुभव की ओर बढ़ते हुए, भा.प्रौ.सं मुंबई  अनुसंधान टीम ने सोने के खोल के भीतर एक जैव-अवक्रमनीय लिपिड कोर को रखकर लिपोस एयू एनपीज़ के लिए एक कोर-शैल संरचनात्मक प्रभाव कार्यान्वित किया। लिपिड कोर दवा का वाहक बन सकता है और अवरक्त (एनआईआर) प्रकाश के संपर्क में आने पर इस दवा को मुक्त कर देता है। हालांकि, डॉ अरविंद कुमार रेंगन, जो इस पत्र के पहले लेखक हैं, स्पष्ट करते हैं "लिपोस एयू एनपी की विशिष्टता केवल उसकी ड्रग डिलीवर करने के गुण के कारण नहीं हैं, यह इसके कई उपयोगों में से एक उपयोग मात्र है, इसकी विशिष्टता जैविक रूप से सुरक्षित और अप्रत्याशित तरीके से कैंसर के इलाज करने की क्षमता में है।" अरविंद बताते हैं: जब एनआईआर प्रकाश लिपोस एयू एनपीज़ पर निर्देशित होता है, तो यह एनपी के साथ प्रतिक्रिया करता है जिससे भारी मात्रा में उष्मीय ऊर्जा उत्सर्जित होती है। यह उष्मीय ऊर्जा गैर-बायोडिग्रेडेबल स्वर्ण कणों को 5nm आकार में तोड़ता है जिन्हें शरीर द्वारा स्वाभाविक रूप से समाप्त किया जा सकता है। इसका, जैसा कि पहले चर्चा की गई है, स्वास्थ्य रक्षा में बड़ा योगदान रहेगा, इसके अतिरिक्त, जारी उष्मीय ऊर्जा सीधे कैंसर कोशिकाओं को मार सकती है, जो अंततः रोगियों पर किसी विषैली दवाओं के उपयोग करने की बाध्यता को समाप्त कर सकती है। "पीटीटी का एक कम स्पष्ट लाभ," वह कहते हैं, "सर्जिकल हस्तक्षेप के विपरीत, लिपोस एयू एनपीस शरीर के दूरस्थ क्षेत्र में अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को हानि पहुंचाए बिना पहुंच सकता है।" कुल मिलाकर, लिपोस एयू एनपीस के कई कार्यात्मक पहलुओं के बीच तालमेल कैंसर रोगियों के उपचार की गुणवत्ता को काफी बढ़ा सकता है। इस तकनीक के नैदानिक प्रयोग से हम कितनी दूर हैं? इस मामले में भी एक अच्छी खबर है |  अरविंद उत्साही रूप से ध्यान आकर्षित करते हैं  कि मानव नैदानिक परीक्षणों में एनपी को भी शामिल किया गया हैं और ये परीक्षण पहले से ही अमेरिका में चल रहे हैं। अतः वह दिन दूर नहीं है जब सोने की रहस्यमय चिकित्सा शक्ति हमारे जीवन का भाग बन जाएगी।

 

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