चिकित्सा अग्रिम तथा यात्रा भत्ता
चिकित्सा अग्रिम
 

जब उपचार बहुत ही मँहगा होता है तो बिमारी की प्रकृति अपेक्षित समय और उपचार की लागत को उल्लेख करते हुए चिकित्सा अधिकारी द्वारा विधिवत प्रमाणित चिकित्सा अग्रिम के लिए अनुरोध पर कर्मचारी सदस्यों को 80% तक चिकित्सा अग्रिम दिया जाता है । इस प्रकार के संदत्त चिकित्सा अग्रिम का समायोजन कर्मचारी सदस्य के द्वारा अनुवर्ती प्रतिपूर्ति के दावा से होता है । समुचित समय पर कर्मचारी यदि दावा प्रस्तुत करने में विफल रहता है तो इस अग्रिम की वसूली उसके वेतन बिल से होगी । यदि कर्मचारी सदस्य इतना बीमार है कि वह आवेदन नहीं कर सकता है तो इस चिकित्सा अग्रिम के लिए यह अनुरोध उसकी पत्नी/पति अथवा विधिक वारिस द्वारा किया जा सकता है । दो से अधिक चिकित्सा अग्रिम साथ-साथ प्रदान नहीं किए जा सकते हैं ।


चिकित्सा यात्रा भत्ता
 

* कर्मचारी सदस्यों और उनके परिवार के सदस्यों को मान्यता प्राप्त अस्पतालों में इलाज हेतु प्रवेश के साथ-साथ निजी विशेषज्ञों से परामर्श सहित चिकित्सा सेवा प्राप्त करने हेतु की गयी यात्राओं के लिए यात्रा भत्ता देय होगा बशर्तें कि प्राधिकृत चिकित्सक की लिखित राय से यात्रा की गयी हो और यात्रा प्रत्येक ओर से 8 कि.मी. की दूरी से अधिक के लिए की गयी हो । जहाँ प्राधिकृत चिकित्सक यह प्रमाणपत्र देता है कि रोगी स्वयं अपनी यात्रा नहीं कर पायेगा, उन स्थितियों में रोगी के सहायक को भी यात्रा के लिए यात्रा भत्ता देय होगा ।

* यात्रा भत्ते का भुगतान संविधि (अनुसूची ए.ए.) में की गयी व्यवस्था के अलावा समय-समय पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित यात्रा भत्ता नियमों के अनुसार किया जायेगा । चिकित्सा यात्रा भत्ते के दावों को यात्रा भत्ता प्रपत्र फार्म में और उस स्थान के उस चिकित्सा अधिकारियों द्वारा प्रमाणित एवं प्रति हस्ताक्षरित किया जाना चाहिए जिसने रोगी को किसी बाहरी अस्पतालें/विशेषज्ञों को उपचार के लिए भेजा हो, प्रस्तुत किया जाना चाहिए । यात्रा भत्ते की पात्रता निम्नानुसार हैं :

- मूल वेतन - 6500/- रूपये और इससे अधिक – टैक्सी/बस/रेल (प्रथम श्रेणी)
- मूल वेतन - 6499/- रूपये और इससे कम – ऑटो/बस/रेल (द्वितीय श्रेणी)

* एम्बुलेंस उपलब्धता के आधार पर ऐसे रोगी को बाहरी अस्पतालों में स्थानांतरित करने के लिए प्रदान किया जाता है । ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा अधिकारियों/सिस्टरों द्वारा रोगियों के विवरण और उनके भेजे जाने के प्रयोजन आदि के लिए एम्बुलैंस पर्ची तैयार करेंगे ।

* तथापि जिन रोगियों के लिए एम्बुलेंस आवश्यक नहीं हैं परन्तु अत्याधिक बीमार होने के कारण सार्वजनिक परिवहन से यात्रा नहीं कर सकते हैं और वे टैक्सी किराये के लिए हकदार भी नहीं है । ऐसे रोगी प्राधिकृत चिकित्सक द्वारा भेजने की अनुमति संबंधी सिफारिश पर टैक्सी किराये की पूरे राशि की प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं ।